Krishna Janmashtami 2026 Date:
4 सितंबर 2026, शुक्रवार
स्थान: इंदौर, मध्य प्रदेश
निशीथ पूजा मुहूर्त: 12:03 AM से 12:49 AM, 5 सितंबर 2026
पूजा अवधि: 46 मिनट
दही हांडी: 5 सितंबर 2026, शनिवार
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव कृष्ण जन्माष्टमी का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। वर्ष 2026 में इंदौर सहित देश के कई हिस्सों में जन्माष्टमी का प्रमुख पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और मध्यरात्रि में भगवान के जन्म का उत्सव मनाते हैं।
इंदौर के लिए उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, जन्माष्टमी की रात निशीथ काल में 12:03 AM से 12:49 AM तक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और पूजा का विशेष समय रहेगा। यह अवधि कुल 46 मिनट की है।
Krishna Janmashtami 2026 कब है?
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 शुक्रवार, 4 सितंबर को है। जन्माष्टमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के दौरान हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की पूजा में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और निशीथ काल को विशेष महत्व दिया जाता है।
2026 के पंचांग के अनुसार:
* जन्माष्टमी: 4 सितंबर 2026, शुक्रवार
* अष्टमी तिथि प्रारंभ: 4 सितंबर, रात 2:25 बजे
* अष्टमी तिथि समाप्त: 5 सितंबर, रात 12:13 बजे
* रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 4 सितंबर, रात 12:29 बजे
* रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 4 सितंबर, रात 11:04 बजे
* निशीथ पूजा: 5 सितंबर की मध्यरात्रि में
अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के इन समयों के आधार पर 4 सितंबर को जन्माष्टमी का मुख्य पर्व माना जा रहा है।
इंदौर में Krishna Janmashtami 2026 का पूजा मुहूर्त
इंदौर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के लिए निशीथ पूजा मुहूर्त रात 12:03 बजे से 12:49 बजे तक रहेगा।
यह मुहूर्त 5 सितंबर 2026 की मध्यरात्रि में आएगा।
Nishita Puja Muhurat 2026
| विवरण | समय |
|---|---|
| जन्माष्टमी | 4 सितंबर 2026, शुक्रवार |
| निशीथ पूजा प्रारंभ | 12:03 AM, 5 सितंबर |
| निशीथ पूजा समाप्त | 12:49 AM, 5 सितंबर |
| पूजा अवधि | 46 मिनट |
| मध्यरात्रि का समय | 12:26 AM के आसपास |
| दही हांडी | 5 सितंबर 2026 |
निशीथ काल को जन्माष्टमी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है, क्योंकि धार्मिक परंपरा में भगवान कृष्ण का जन्म इसी मध्यरात्रि काल से जोड़ा जाता है।
जन्माष्टमी 2026 पर अष्टमी तिथि कब से कब तक है?
2026 में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 2:25 बजे शुरू होगी और 5 सितंबर को रात 12:13 बजे समाप्त होगी।
अर्थात जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण की जन्म पूजा के दौरान अष्टमी तिथि का विशेष संयोग बन रहा है।
तिथि का विवरण:
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 2:25 AM, 4 सितंबर 2026
अष्टमी तिथि समाप्त: 12:13 AM, 5 सितंबर 2026
पंचांग के अनुसार तिथि और नक्षत्र के समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं, इसलिए धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित है।
जन्माष्टमी 2026 पर रोहिणी नक्षत्र का समय
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व है।
2026 में:
- रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 12:29 AM, 4 सितंबर
- रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 11:04 PM, 4 सितंबर
जन्माष्टमी की पूजा में रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का महत्व होने के कारण इस दिन मध्यरात्रि पूजा को विशेष माना जाता है।
जन्माष्टमी 2026 पर पूजा कैसे करें?
जन्माष्टमी के दिन भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं। सामान्य रूप से पूजा की तैयारी दिन में ही कर ली जाती है और मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय विशेष पूजा की जाती है।
जन्माष्टमी पूजा की सामान्य विधि
- जन्माष्टमी के दिन व्रत या सात्विक आहार का संकल्प लें।
- पूजा स्थान की साफ-सफाई करें।
- भगवान कृष्ण या लड्डू गोपाल को नए वस्त्र पहनाएं।
- पूजा स्थान को फूलों और दीपों से सजाएं।
- पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें।
- चंदन, अक्षत, पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।
- माखन-मिश्री और अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित करें।
- मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाएं।
- श्रीकृष्ण मंत्र, कृष्ण नाम और भजन-कीर्तन करें।
- आरती के बाद प्रसाद वितरित करें।
जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की पूजा का महत्व
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा विशेष रूप से लोकप्रिय है। भक्त उन्हें बाल कृष्ण के रूप में सजाते हैं और झूला सजाकर जन्मोत्सव मनाते हैं।
कई परिवारों में मध्यरात्रि के समय लड्डू गोपाल का पंचामृत अभिषेक किया जाता है। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र, आभूषण, मुकुट और फूलों से सजाकर भोग लगाया जाता है।
जन्माष्टमी 2026 का पारणा समय कब है?
जन्माष्टमी व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पारणा, यानी व्रत खोलने का समय भी महत्वपूर्ण होता है।
आपके साझा किए गए इंदौर पंचांग विवरण के अनुसार, धर्मशास्त्र के अनुसार पारणा सूर्योदय के बाद किया जाएगा, क्योंकि पारणा के दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुके होंगे।
हालांकि, अलग-अलग परंपराओं में पारणा के नियम अलग हो सकते हैं। कुछ स्थानों पर व्रत खोलने का समय निशीथ पूजा, तिथि समाप्ति या स्थानीय धार्मिक परंपरा के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पारणा करना चाहिए।
जन्माष्टमी 2026 पर दही हांडी कब है?
दही हांडी 5 सितंबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी।
भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की माखन चोरी की लीलाओं से जुड़ी दही हांडी परंपरा में मटकी को ऊंचाई पर बांधा जाता है और युवाओं की टोलियां मानव पिरामिड बनाकर उसे फोड़ती हैं।
महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में दही हांडी जन्माष्टमी उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहती है।
4 सितंबर या 5 सितंबर: जन्माष्टमी किस दिन मनाएं?
2026 में जन्माष्टमी की तारीख को लेकर अलग-अलग परंपराओं के कारण लोगों के बीच भ्रम हो सकता है।
स्मार्त परंपरा के अनुसार 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी का मुख्य पर्व माना जा रहा है। वहीं कुछ वैष्णव/ISKCON परंपराएं 5 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी मनाती हैं। इसलिए मंदिर या संप्रदाय विशेष के अनुसार तारीख अलग दिखाई दे सकती है।
इस अंतर का मुख्य कारण जन्माष्टमी निर्धारण की परंपरा और व्रत-पारण के अलग-अलग धार्मिक नियम हैं।
इसलिए यदि आप किसी विशेष मंदिर, संप्रदाय या परिवार की परंपरा का पालन करते हैं, तो उसी परंपरा के पंचांग को प्राथमिकता दें।
जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु के अवतार के रूप में पूजा जाता है। जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि धर्म, कर्म, भक्ति और जीवन में संतुलन के संदेश से जुड़ा पर्व भी है।
भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने कर्म और धर्म के महत्व को समझाया। यही कारण है कि जन्माष्टमी के अवसर पर कृष्ण भक्त केवल पूजा ही नहीं करते, बल्कि श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों का स्मरण भी करते हैं।
जन्माष्टमी 2026 पर क्या करें?
जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार कई धार्मिक कार्य कर सकते हैं:
- भगवान श्रीकृष्ण का नाम जप करें।
- श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें।
- लड्डू गोपाल की पूजा करें।
- तुलसी दल और माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
- कृष्ण मंदिर में दर्शन करें।
- जरूरतमंद लोगों को भोजन या वस्त्र दान करें।
- रात में कृष्ण जन्मोत्सव और आरती में शामिल हों।
- घर में कृष्ण भजन और कीर्तन करें।
Krishna Janmashtami 2026: एक नजर में
| जानकारी | विवरण |
| पर्व | कृष्ण जन्माष्टमी |
| वर्ष | 2026 |
| मुख्य तिथि | 4 सितंबर 2026 |
| वार | शुक्रवार |
| स्थान | इंदौर, मध्य प्रदेश |
| अष्टमी तिथि प्रारंभ | 2:25 AM, 4 सितंबर |
| अष्टमी तिथि समाप्त | 12:13 AM, 5 सितंबर |
| रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ | 12:29 AM, 4 सितंबर |
| रोहिणी नक्षत्र समाप्त | 11:04 PM, 4 सितंबर |
| निशीथ पूजा | 12:03 AM – 12:49 AM, 5 सितंबर |
| पूजा अवधि | 46 मिनट |
| दही हांडी | 5 सितंबर 2026 |






